Saturday, February 24, 2018

चलो कब्र की ओर

रेटिंग : 3.5/5
कॉमिक्स 24 फ़रवरी 2018 को पढ़ी

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट : पेपरबैक
पृष्ठ संख्या : 64
प्रकाशक : राज कॉमिक्स
आईएसबीएन : 9789332411616
श्रृंखला : एंथोनी
मूल्य : 30 रूपये




एंथोनी परेशान था। रूपनगर में लोग काफी तादात में आत्महत्या करने लगे थे। कईयों को तो एंथोनी बचाने में कामयाब हो चुका था लेकिन फिर भी कई लोग मौत के आगोश में समा चुके थे।

रूप नगर के बाशिंदों के अन्दर ये आत्मघाती प्रवृत्ति अचानक कैसे जागृत हो गयी थी?

आखिर इन आत्महत्याओं के पीछे क्या कारण था?

 क्या एंथोनी इन्हें रोक पाया?

या रूप नगर का आखिरी नागरिक भी कह उठेगा चलो कब्र की ओर?

हाल फिलहाल में मैंने एंथोनी की काफी कॉमिक्स ले ली हैं और इसलिए इन्हें पढ़ भी रहा हूँ। मेरी कोशिश रहती है कि हफ्ते में एक कॉमिक तो पढ़ी ही जाये और आज के लिए मैंने इस कॉमिक को चुना।

कॉमिक बुक की बात करूँ तो मुझे कहानी पसंद आई। इसमें एंथोनी एक सुपर हीरो तो है ही लेकिन लोगों को अच्छा जीवन जीने के लिए प्रेरित भी करता दिखता है। कॉमिक में लेखक तरुण कुमार वाही  ने काफी सामजिक बुराईयों को छुआ है और उससे सकारात्मक तरीके से कैसे निपटा जा सकता है ये भी दर्शाया है। इसके लिए वो बधाई के पात्र हैं।

प्रिंस एंथोनी का साथी,दोस्त और मेंटर है और ये इस कॉमिक में दिखता है। उनके आपस का समीकरण ऐसा ही है जैसे दो जिगरी दोस्तों का होता है। कॉमिक में जब एंथोनी को ज्यादा ज्ञान देते हुए प्रिंस कहता है कि लगता है एंथोनी कब्र से सीख कबाब खाकर निकला था तो उनके बीच की बेतकल्लुफी साफ़ झलकती है।

कॉमिक का ज्यादातर हिस्से में एंथोनी लोगों को बचाते हुए ही दिखता है। लड़ाई के पैनल कम हैं लेकिन तगड़े हैं। जलात्मा  और कब्रा नाम के दो मुख्य खलनायक ही इसमें आते हैं जिनसे उसकी मुठभेड़ होती है। दोनों का कांसेप्ट मुझे पसंद आया और विशेषकर जलात्मा तो काफी भयावह लगा। एक बार जलात्मा की पकड़ से जब एंथोनी बाहर आता है तो एक बार को मुझे लगा था कि जलात्मा वायु में मौजूद नमी का न इस्तेमाल करे। ऐसा होता नहीं है लेकिन होता तो देखना रोचक होता कि एंथोनी उससे कैसा छूटता। दूसरा मुख्य खलनायक कब्रा है। खलनायक के रूप में ये मुझे अच्छा लगा लेकिन इसकी बेक स्टोरी कमजोर लगी। मुझे लगता है उस पर थोड़ा बहुत काम करके उसे और मजबूत बनाया  जा सकता था।

इन दोनों के इलावा एक आध छुटपुट लड़ाई और मार पिटाई के दृश्य कॉमिक में हैं जो कि मजेदार थे। इसके साथ ही कहानी में जूली, जो कि एंथोनी की बीवी थी, की भी एंट्री होती है और वो पैनल भावुक करते हैं। एंथोनी और जूली के बीच की तड़प को महसूस किया जा सकता है और एंथोनी के लिए दुःख भी होता है।

कॉमिक के  आर्ट वर्क की बात करूँ तो  मुझे वो ठीक ठाक लगा। इस कॉमिक में मैंने पहली बार नोटिस किया कि एंथोनी की आँखों में पुतलियाँ नहीं है। वो पूरी सफ़ेद हैं। इससे वो ज्यादा डरावना लगता है। बाकी का आर्टवर्क ठीक है। कहानी को कॉम्प्लीमेंट करता है।

कुल मिलाकर अंत में तो कहूँगा कि कॉमिक मुझे काफी पसंद आई। थोड़ा मुख्य खलनायक कब्रा की कहानी पे फोकस करके उसे मजबूत बनाया होता और उसकी मौजूदगी कॉमिक में थोड़ी और बढ़ाई होती  तो कॉमिक और अच्छा बन सकता था। कॉमिक पढने लायक है और एक बार पढ़ा जाना चाहिये।

अगर आपने इस कॉमिक को पढ़ा है तो आपको ये कैसा लगा? अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखकर बताईयेगा। अगर आपने इसे नहीं पढ़ा है और पढ़ना चाहते हैं तो इसे निम्न लिंक से मँगवा सकते  हैं:

अमेज़न
राज कॉमिक्स

Monday, February 19, 2018

सात तालों में बंद मौत - अमित खान

रेटिंग: 2/5
किताब 13 फरवरी 2018 से लेकर 16 फरवरी 2018 के बीच पढ़ी

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट : पेपरबैक
पृष्ठ संख्या : 272
प्रकाशक : रवि पॉकेट बुक्स
श्रृंखला : कमांडर करण सक्सेना


पहला वाक्य:
वह रॉ(रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) का हेडक्वार्टर था - जहाँ इस समय कमांडर करण सक्सेना मौजूद था और प्रोजेक्टर रूम के विशाल परदे पर हिन्द महासागर का अत्यंत विहंगमकारी दृश्य देख रहा था।

हिन्द महासागर का एक इलाका कुछ समय से बहुत कुख्यात हो रखा था। उस इलाके में कुछ रहस्यमयी घट रहा था जिस करण उधर से होकर गुजरने वाले जहाज, नौकायें और स्टीमर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे। अब ऐसी ही एक जहाज दुबारा दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस बार फर्क ये था कि इस जहाज में भारत के जाने माने न्यूक्लियर साइंटिस्ट प्रोफेसर भट्ट भी सवार थे। और प्रोफेसर भट्ट के पास एक फ्लॉपी थी जिसमे उनके सारे परमाणु प्रयोगों की जानकारी थी।

आखिरी खबर मिलने तक कोस्ट गार्ड ने प्रोफेसर भट्ट को सकुशल तो निकाल लिया था लेकिन फिर ऐसा कुछ घटित हुआ कि कोस्ट गार्ड्स और प्रोफेसर भट्ट नामालूम किधर गायब हो गये। रह गयी थी तो बस एक आखिरी संपर्क कॉल जिसमे कोस्ट गार्ड्स ने मदद की गुहार लगाई थी और जिसका अन्त  उनकी हृदयविदारक चीखों से हुआ था। फिर  न उनकी लाशें मिली न ही स्टीमर के अवशेष।

आखिर क्यों हो रही थी इस जगह में इतनी दुर्घटनायें? प्रोफेसर भट्ट किधर गायब हो गये थे? क्या ये एक दुर्घटना था या एक सोची समझी चाल। क्या भारत के परमाणु रहस्य सुरक्षित थे?

ऐसे ही सवालों ने भारत सरकार को परेशान कर रखा था। इन्ही सवालों के जवाब ढूँढने के लिए करण सक्सेना को ये मिशन सौंपा गया।

क्या करण सक्सेना इस गुत्थी को सुलझा पाया?

Sunday, February 11, 2018

Believe This You'll Believe Anything by James Hadley Chase

Rating: 2.5/5
Read between January 3rd 2018 and January 5th 2018

Edition Details:
Format: paperback
Page Count:
Publisher: Mastermind Books
ISBN:9788184680973





First Sentence:
I saw him through the glass wall of my office as he came into the outer office.


Clay Burden had never thought he would meet Val again. Val, the woman, he had loved with all his heart and whom he considered his soul mate. It had been six years since Val had broken up with him and had left. But for Clay moving own had been a task. He had moved to Paradise city and was now married to Rhoda but he was not able to forget Val.

So when Clay met Val again it was a shock for him. He had been carrying a torch for her and now she was in the same city. It seemed she too had feelings for him. He had decided he wouldn't let her go this time.

But there was this tiny problem. Val was married to the very rich and very powerful Henry Vidal. And Val had also changed a little. She was scared and had notions which couldn't be called normal. She thought Henry was the devil incarnate and he had trapped Val with his evil powers.

Whatever may be the truth, Clay knew that he wanted Val and would do anything to have her. Even murder. 

Was Henry really the devil? Will Clay be finally able to get his long lost love? What will Clay do?

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