संस्करण विवरण:
फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 124 | प्रकाशक: फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन | चित्रांकन: पार्थ सेनगुप्ता
पुस्तक लिंक: अमेज़न
कहानी
बारह वर्षीय तारा को किताबें पढ़ने का शौक था। यही कारण था जब उसे नई किताबों की दुकान खुलने का इश्तिहार दिखा तो वह खुद को वहां जाने से रोक नहीं पायी।
वह क्या जानती थी कि उसे न केवल उधर एक रोचक किताब मिलेगी बल्कि एक ऐसी दुनिया की यात्रा का मौका भी मिलेगा जिसकी उसकी कल्पना भी नहीं की थी।
आखिर कैसी थी ये किताब?
किस दुनिया की यात्रा पर तारा को जाने का मौका मिला?
इस यात्रा में उसके साथ क्या क्या हुआ?
मुख्य किरदार
वंदना - तारा की माँ
शेखर - तारा के पिता जो कुछ समय पूर्व गायब हो गए थे
मोहित - तारा के पिता के दोस्त
जोजो - ड्रैगन
लूसी, रूबी,ओपल - संदेशवाहक बिल्ली
परबतिया - एक खानाबदोश जो भविष्य देख सकती थी
वॉल्ट - एक जादूगर बौना जो पांचों क्षेत्र पर अपने जादू के बल पर राज करता था और उन पर जुल्म करता था
मॉस - वॉल्ट का भाई
गेरू - एक विशालकाय व्यक्ति
बेली - आत्मा क्षेत्र की मुखिया
पोलो - ओपल का उड़ने वाला घोड़ा
विचार
फंतासी एक ऐसी विधा है जहाँ लेखकों को अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाकर एक नवीन दुनिया की रचना करने का मौका मिलता है। जो चीजें असल दुनिया में नामुमकिन नजर आती है वह फंतासी में संभव ही नहीं होती बल्कि कई बार जो आपने सोचा होता है उससे कई दूर की चीजें लेखक अपनी कल्पना के माध्यम से अपने पाठकों को परोस देता है। ऐसे में यथार्थवादी साहित्य की सीमाओं के न होने के चलते एक अत्यधिक रोमांचक कथानक आपको पढ़ने को मिल जाता है। शायद यही कारण है कि पाठकों फिर चाहे वह बच्चे हों या बड़े उन्हें फंतासी पढ़ना पसंद रहा है। बच्चों को तो यह विधा काफी भाति है और काफी समय तक इस विधा को बच्चों की विधा की विधा ही माना जाता था। पर अफसोस की बात है कि हिंदी में फंतासी में ज्यादा कुछ आता नहीं है। न बच्चों के लिए और न वयस्कों के ले ही। ऐसे में कभी कभार फंतासी में कुछ आता है तो उसे लेकर उत्सुक होना लाजमी है। यही उत्सुकता मुझे 'तारा की अनोखी यात्रा' के लिए थी। उत्सुकता थी तो आते ही इसे ले लिया था लेकिन ये दीगर बात है कि पढ़ने का मौका अब लग रहा है।
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पुस्तक लिंक: अमेज़न

